((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)) عَشْرَ مَرّاتٍ بَعْدَ صَلاةِ الْمَغْرِبِ وَالصُّبْحِ.
उच्चारण:
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लह, लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, युह्यी व युमीत, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।
हिंदी अर्थ:
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, बादशाहत उसी की है और तारीफ़ भी उसी की है, वह ज़िंदा करता है और मौत देता है, और वह हर चीज़ पर कादिर है। (मगरिब और फज्र की नमाज़ के बाद 10 बार पढ़ें)
मगरिब-फज्र के बाद 10 बार पढ़ने की दुआ